गाने का बोल लिखते समय नाम की जगह उपनाम कब डालें: 'माँ' लिखें या 'अम्मा', 'दोस्त' लिखें या असली नाम
गाने के बोल में 'माँ' या 'अम्मा', 'दोस्त' या असली नाम — कब क्या ठीक बैठता है, ठोस उदाहरणों के साथ।
गाने का बोल लिखते वक्त सबसे उलझाने वाला सवाल यही आता है — नाम डालें या रिश्ता? 'रीना' लिखें या 'बहन'? 'अम्मा' लिखें या 'माँ'? सच यह है कि दोनों अपना काम करते हैं, बस जगह अलग है। रिश्ते का शब्द गाने को बड़ा कर देता है, नाम उसे छोटा और अपना बना देता है। नीचे कुछ ऐसे उदाहरण हैं जिन्हें आप सीधे आज़मा सकते हैं।
रिश्ते का शब्द कब काम करता है
जब गाना किसी एक इंसान के बारे में नहीं, बल्कि एक एहसास के बारे में हो, तब रिश्ते का शब्द ठीक बैठता है। 'अम्मा' लिखें तो सुनने वाले का अपना घर याद आ जाता है। 'माँ' लिखें तो बात थोड़ी औपचारिक लगती है, जैसे किसी किताब की कविता।
फ़र्क़ देखिए:
- अम्मा की चाय, अम्मा की डाँट — यह नज़दीकी है, रसोई की गंध आती है।
- माँ की ममता, माँ का प्यार — यह बड़ा है, पर थोड़ा दूर से बोला हुआ लगता है।
यही बात दोस्तों पर लागू होती है। 'मेरा दोस्त' लिखने से गाना हर किसी का हो जाता है। पर जब आप किसी ख़ास शाम के बारे में लिख रहे हों — कॉलेज के बाद की चाय, छत पर बैठकर बातें — तब 'अर्जुन' लिखना ज़्यादा सच्चा लगता है।
नाम कब गाने को अपना बना देता है
नाम तब चलता है जब गाना एक याद, एक मौक़ा, या एक किस्सा हो। सोचिए, बहन की मेहंदी का गाना। अगर आप लिखें मेरी बहन की मेहंदी, तो वह हर बहन का गाना बन जाता है — ठीक है, पर फीका। अगर लिखें नेहा की मेहंदी, नेहा के फेरे, तो वीडियो में वही बहन दिखती है और गाना उसका हो जाता है।
यही काम ऑफ़िस की विदाई पर होता है। अलविदा दोस्तों सबके लिए चलेगा। लेकिन अलविदा प्रिया, तेरी कुर्सी खाली है — यह सिर्फ़ उस टीम के लिए है, और वही टीम इसे बार-बार सुनेगी।
दोस्त के दूसरे शहर जाने पर भी यही तरीक़ा है। दोस्त जा रहा है सुनकर किसी को कुछ नहीं होता। समीर जा रहा है, पुणे को सुनकर बाक़ी दोस्त फ़ोन उठा लेते हैं।
नाम डालने से पहले ये तीन बातें सोचें
पहली — नाम कितनी बार आएगा? एक बार नाम आना अच्छा लगता है। हर लाइन में नाम आए तो गाना सरकारी चिट्ठी जैसा लगने लगता है। कोरस में नाम रखें, अंतरे में रिश्ता।
दूसरी — गाना किसके लिए है? अगर आप इसे परिवार के ग्रुप में भेज रहे हैं, तो नाम चलेगा। अगर इंस्टाग्राम पर सबके लिए डाल रहे हैं, तो रिश्ते का शब्द ज़्यादा लोगों को जोड़ेगा।
तीसरी — नाम बोलने में कैसा लगता है? हिंदी गानों में 'रीना', 'अर्जुन', 'समीर' जैसे नाम आसानी से बैठ जाते हैं। बहुत लंबे या जुड़े नाम ताल तोड़ देते हैं। ऐसे में आप छोटा नाम चुन सकते हैं या उपनाम की जगह रिश्ता रख सकते हैं।
एक आसान तरीक़ा यह है — पहले गाना रिश्ते के शब्दों में पूरा लिखें। फिर एक जगह चुनें, कोरस या आख़िरी पंक्ति, और वहाँ असली नाम डाल दें। तब गाना न सिर्फ़ बड़ा रहेगा, न सिर्फ़ अपना — दोनों हो जाएगा।
jhoom.baby में आप यह सब एक ही जगह कर सकते हैं। आइडिया लिखिए, गाना बनाइए, सुनिए और फिर नाम बदलकर दोबारा बनाइए — देखिए कौन सा वर्शन बेहतर लगता है। कुछ ही मिनटों में बोल और संगीत तैयार मिलता है, जिसे आप शेयर और डाउनलोड कर सकते हैं।
सुनिए कैसा लगता है
- Kapi Mira Gentle acoustic folk lullaby in English
- अर्जुन के पाँच मिनट upbeat desi pop
- Faster Than Light EDM