अपना गाना बनाएं

गाने का बोल लिखते समय ख़ुद को दोहराने से कैसे बचें

गाने के बोल में दोहराव से बचने के आसान तरीक़े — भाव एक, शब्द नए। साथ में जान-बूझकर दोहराव डालने का तरीक़ा।

एक ही बात को तीन बार लिखना सबसे आसान काम है। पर जब गाना बजता है, तो सुनने वाले को लगता है कि कुछ तो गड़बड़ है — जैसे चाय में चीनी तीन बार डाल दी हो। बोल लिखते समय दोहराव पकड़ना और उसे ठीक करना, यही असली काम है।

भाव एक, शब्द नए

सबसे पहले यह देखिए कि आप असल में क्या कहना चाहते हैं। ज़्यादातर दोहराव इसलिए आता है क्योंकि भाव साफ़ नहीं है, तो हम उसे दोबारा, तीसरी बार लिख देते हैं।

मान लीजिए भाव यह है — "वो जा रहा है और मैं टूट रही हूँ।" अब इसे तीन लाइनों में ऐसे कह सकते हैं:

तीनों लाइनें एक ही भाव कह रही हैं। पर किसी में "टूटना" शब्द नहीं आया। यही तरीक़ा है — भाव को पकड़िए, शब्द को छोड़ दीजिए। जब आप भाव लिखते हैं तो वही लाइन बार-बार आती है। जब आप तस्वीर लिखते हैं, तो हर बार नई लाइन बनती है।

किस हिस्से में क्या रखें

गाने के हर हिस्से का अपना काम है। यह जान लेने से दोहराव अपने आप कम हो जाता है।

अंतरा — आगे बढ़ाने की जगह

अंतरे में नई बात आनी चाहिए। अगर पहले अंतरे में आपने कहा कि वो चला गया, तो दूसरे अंतरे में कहिए कि उसके बाद कमरे में क्या बदला, या आपने क्या किया। हर अंतरा एक क़दम आगे। वरना तीन अंतरे लगेंगे तीन बार वही बात।

एक आसान तरीक़ा — हर अंतरे से पहले ख़ुद से पूछिए, "पिछले अंतरे के बाद क्या हुआ?" जवाब न मिले, तो वो अंतरा अभी तैयार नहीं है।

कोरस — यहाँ दोहराव दोस्त है

कोरस में दोहराव ठीक है, बल्कि चाहिए। लोग कोरस याद रखते हैं, इसलिए वही लाइन लौटती है। पर सावधानी — कोरस के अंदर भी अगर हर लाइन एक जैसी लगे, तो गाना भारी लगता है। कोरस की दो लाइनें अलग रखिए, बाक़ी लौट सकती हैं।

कब लाइन हटाना ही बेहतर है

कई बार दोहराव शब्दों में नहीं, सोच में होता है। दो लाइनें अलग दिखती हैं, पर कहती एक ही बात हैं। ऐसी लाइन को हटा दीजिए।

उदाहरण: "मैं अकेली हूँ, कमरा ख़ाली है।" और अगली लाइन — "कोई नहीं है यहाँ, सब चला गया।" दोनों एक ही कह रही हैं। पहली रखिए, दूसरी हटा दीजिए। जगह बचेगी, और उस जगह पर एक नई तस्वीर आ सकेगी — जैसे, "फ़्रिज में उसका आधा केक पड़ा है।"

एक और तरीक़ा: पूरा गाना लिखने के बाद हर लाइन पढ़िए और पूछिए — "यह लाइन पहले किसी लाइन जैसी लग रही है?" अगर हाँ, तो उसे हटाने की हिम्मत कीजिए। गाना हल्का लगेगा।

जान-बूझकर दोहराव

हर दोहराव बुरा नहीं है। कुछ दोहराव गाने को जोड़ते हैं। जैसे हर अंतरे के बाद वही एक लाइन लौटे — "और मैं यहीं हूँ।" यह सुनने वाले के दिमाग़ में कील की तरह बैठ जाती है।

ऐसा दोहराव तब काम करता है जब बाक़ी गाना बदलता रहे। अगर सब कुछ दोहरा रहा है, तो यह लाइन भी पानी में पानी हो जाएगी।

एक छोटा अभ्यास: अपने गाने की सबसे पसंदीदा लाइन चुनिए। उसे तीन जगह रखिए — शुरू में, बीच में, और आख़िर में। बाक़ी हर जगह नई बात लिखिए। यही फ़र्क़ सुनाई देगा।

याद रखिए, एक अच्छा गाना वो है जो एक ही बात कई तरीक़ों से कहता है — न कि एक ही तरीक़े से कई बार।

सुनिए कैसा लगता है